Mon–Sat • Sunday Closed

योग

योग FAQ — 50 आम प्रश्न और प्रामाणिक उत्तर

अभ्यास, स्वास्थ्य लाभ, सावधानियाँ और रोज़मर्रा के जुड़े सवालों पर आधारित सामान्य मार्गदर्शन।

यह संकलन योग के अभ्यास, स्वास्थ्य लाभ, सावधानियों और रोज़मर्रा के जुड़े सवालों पर आधारित है। उत्तर सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं; किसी भी चिकित्सीय स्थिति में योग से पहले डॉक्टर या प्रमाणित योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योग क्या है और इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई?

योग एक प्राचीन भारतीय विद्या है जो शरीर, मन और आत्मा के समन्वय पर केंद्रित है। इसकी उत्पत्ति लगभग 5,000 वर्ष पहले भारत में हुई। "योग" शब्द संस्कृत की धातु "युज" से बना है, जिसका अर्थ है "जोड़ना" या "मिलाना" — अर्थात व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक चेतना से जुड़ना। महर्षि पतंजलि को "योग का जनक" कहा जाता है, जिन्होंने पतंजलि योगसूत्र में योग को व्यवस्थित किया।

योग के कितने प्रकार (अंग) हैं?

पतंजलि योगसूत्र के अनुसार योग के 8 अंग (अष्टांग) हैं:

  1. यम (सामाजिक आचरण)
  2. नियम (व्यक्तिगत आचरण)
  3. आसन (शारीरिक मुद्राएँ)
  4. प्राणायाम (श्वास नियंत्रण)
  5. प्रत्याहार (इंद्रियों का नियंत्रण)
  6. धारणा (एकाग्रता)
  7. ध्यान (मेडिटेशन)
  8. समाधि (आत्म-ज्ञान की अवस्था)
आसन और योग में क्या अंतर है?

आसन योग का केवल एक हिस्सा (तीसरा अंग) है। आसन का अर्थ है शरीर की विशेष मुद्राएँ, जबकि योग एक संपूर्ण जीवन-शैली है जिसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान, आचार-विचार और आत्म-अनुशासन सभी शामिल हैं।

क्या योग कोई धर्म या पंथ है?

नहीं। योग एक आध्यात्मिक और शारीरिक अभ्यास-विधि है, कोई धर्म नहीं। इसे सभी धर्मों, संस्कृतियों और उम्र के लोग कर सकते हैं। यह विश्वव्यापी रूप से स्वास्थ्य और कल्याण का साधन माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया है।

योग करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

सामान्यतः सुबह सूर्योदय से पहले (ब्रह्म मुहूर्त, लगभग 4–6 बजे) योग के लिए सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि उस समय वातावरण शांत और शुद्ध होता है। हालाँकि, नियमितता सबसे महत्वपूर्ण है — आप अपनी सुविधानुसार किसी भी निश्चित समय पर कर सकते हैं, बस खाना खाने के तुरंत बाद या भूखे पेट अति तीव्र योग से बचें।

क्या योग के लिए खाली पेट होना ज़रूरी है?

हाँ, अधिकतर आसन और प्राणायाम खाली पेट या हल्का भोजन करके (कम से कम 2–3 घंटे बाद) करना चाहिए। भरे पेट योग करने से पाचन संबंधी समस्याएँ और असुविधा हो सकती है। सुबह उठकर हल्का पानी पीकर योग करना सबसे अच्छा है।

योग करने से क्या-क्या लाभ होते हैं?

योग के प्रमुख लाभ हैं: शरीर का लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) बढ़ाना, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना, मुद्रा (पोस्चर) में सुधार, तनाव और चिंता कम करना, रक्त संचार बेहतर करना, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना, पाचन में सुधार, नींद की गुणवत्ता बढ़ाना, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता बढ़ाना।

योग और व्यायाम (जिम) में क्या अंतर है?

जिम/व्यायाम मुख्यतः शारीरिक शक्ति, मांसपेशियों की बनावट और सहनशक्ति पर केंद्रित होता है, जबकि योग शरीर के साथ-साथ मन और श्वास को भी संतुलित करता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं — योग लचीलापन, संतुलन और मानसिक शांति देता है, जबकि जिम शक्ति और बल देता है।

क्या शुरुआती लोगों को योग करना चाहिए?

बिल्कुल। योग सभी स्तरों के लिए उपयुक्त है। शुरुआत करने के लिए सरल आसन जैसे ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, मार्जरी-बितिलासन से शुरुआत करें और किसी प्रमाणित प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में आगे बढ़ें। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाना ही सही तरीका है।

योग कितने दिन/हफ्ते करना चाहिए?

आदर्श रूप से रोज़ाना 15–30 मिनट योग करना लाभदायक है। शुरुआत में हफ्ते में 3–4 दिन भी पर्याप्त है, लेकिन निरंतरता महत्वपूर्ण है। नियमित अभ्यास ही दीर्घकालिक लाभ देता है।

योग करने से कितने दिनों में फर्क दिखता है?

कुछ लोगों को मानसिक शांति और हल्कापन 1–2 हफ्तों में महसूस होता है, जबकि शारीरिक लचीलेपन, ताकत और मुद्रा में बदलाव 4–8 हफ्तों में स्पष्ट होता है। यह व्यक्ति की उम्र, नियमितता और अभ्यास की गहराई पर निर्भर करता है।

योग के लिए क्या पहनना चाहिए?

आरामदायक, ढीले-ढाले या स्ट्रेचेबल कपड़े पहनें जिससे हिलना-डुलना आसान हो। सूती कपड़े सबसे उपयुक्त रहते हैं। योग मैट (योगा चटाई) का उपयोग करना चाहिए ताकि फिसलन न हो और जमीन पर आराम रहे।

क्या महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान योग करना चाहिए?

मासिक धर्म के दौरान हल्के आसन (जैसे वीरभद्रासन, बालासन, मार्जरी-बितिलासन) करना सुरक्षित और आरामदायक है, जो ऐंठन कम कर सकते हैं। हालाँकि, उल्टे आसन (जैसे सर्वांगासन, शीर्षासन), अति तीव्र मोड़ और भारी अभ्यास से बचना चाहिए। किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।

क्या गर्भावस्था में योग करना सुरक्षित है?

हाँ, लेकिन प्रीनेटल योग केवल प्रशिक्षित प्रशिक्षक की देखरेख में और डॉक्टर की अनुमति से करें। गर्भावस्था के दौरान उल्टे आसन, अति गहरे मोड़, पेट के बल या पेट पर दबाव डालने वाले आसन से बचना चाहिए। हल्के स्ट्रेच और श्वास अभ्यास लाभदायक होते हैं।

क्या बुजुर्ग लोग योग कर सकते हैं?

बिल्कुल। बुजुर्गों के लिए योग विशेष रूप से लाभदायक है — यह संतुलन, लचीलापन, जोड़ों की गति और मानसिक स्थिरता में मदद करता है। उन्हें हल्के आसन और कुर्सी-योग (चेयर योग) से शुरुआत करनी चाहिए और अधिक शारीरिक माँग वाले आसन से बचना चाहिए।

क्या बच्चे योग कर सकते हैं?

हाँ, बच्चों के लिए योग बहुत लाभदायक है — यह एकाग्रता, शरीर-जागरूकता, लचीलापन और भावनात्मक संतुलन बढ़ाता है। बच्चों को खेल-खेल में सरल आसन सिखाए जा सकते हैं। उन्हें कठिन और लंबे समय तक स्थिर रहने वाले आसन से बचाना चाहिए।

योग करने के लिए क्या ज़रूरी सामान चाहिए?

सबसे ज़रूरी सामान है एक अच्छी योग मैट। इसके अलावा आरामदायक कपड़े, पानी की बोतल, और वैकल्पिक रूप से योग ब्लॉक, स्ट्रैप (पट्टा) या तकिया उपयोगी हो सकते हैं। शुरुआत में केवल मैट ही पर्याप्त है।

क्या योग वज़न घटाने में मदद करता है?

हाँ। तेज़ गति से किए जाने वाले योग (जैसे सूर्य नमस्कार, विंयास योग) कैलोरी जलाते हैं और मेटाबॉलिज्म बढ़ाते हैं। योग वज़न घटाने के साथ-साथ मांसपेशियों की टोनिंग, पाचन सुधार और तनाव कम करने में भी मदद करता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से वज़न नियंत्रण में सहायक है।

वज़न घटाने के लिए कौन से योगासन सर्वश्रेष्ठ हैं?

वज़न घटाने के लिए सूर्य नमस्कार, वीरभद्रासन (योद्धा मुद्रा), त्रिकोणासन, अर्ध चक्रासन, भुजंगासन, और नौकासन प्रभावी हैं। इन्हें नियमित रूप से और अधिक गति से करने से कैलोरी जलती है।

क्या योग मांसपेशियों की ताकत बढ़ा सकता है?

हाँ। प्लैंक, चतुरंगा दंडासन, वीरभद्रासन, नौकासन, और उत्कटासन जैसे आसन शरीर के भार को उठाकर मांसपेशियों की ताकत बढ़ाते हैं। योग शक्ति प्रशिक्षण का एक कम-प्रभाव (लो-इम्पैक्ट) रूप है।

क्या योग रीढ़ की हड्डी और पीठ दर्द में मदद करता है?

हाँ। मार्जरी-बितिलासन (बिल्ली-गाय मुद्रा), भुजंगासन, शलभासन, बालासन और सेतुबंधासन (Bridge Pose) रीढ़ को लचीला बनाकर पीठ दर्द में राहत दे सकते हैं। हालाँकि, गंभीर पीठ दर्द या हर्निया में पहले डॉक्टर से परामर्श करें और सही आसन का चयन करवाएँ।

योग तनाव और चिंता में कैसे मदद करता है?

योग श्वास पर नियंत्रण (प्राणायाम) और ध्यान के माध्यम से तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करता है और शांति देने वाले हार्मोन (सेरोटोनिन, गाबा) को बढ़ाता है। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम विशेष रूप से चिंता कम करने में प्रभावी हैं।

योग को लेकर एक "योगा ब्रेथ" या श्वास का महत्व क्यों है?

योग में श्वास ही ऊर्जा का माध्यम है। सही श्वास से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ती है, मन शांत होता है, और आसन गहराई से किए जा सकते हैं। बिना सही श्वास के योग अधूरा माना जाता है। सामान्य नियम है — जहाँ शरीर खुलता है वहाँ श्वास लें, जहाँ सिकुड़ता है वहाँ छोड़ें।

प्राणायाम क्या है और इसके लाभ क्या हैं?

प्राणायाम का अर्थ है "प्राण" (जीवन-ऊर्जा) का नियंत्रण, यानी श्वास को नियंत्रित करने की विधि। इसके लाभ हैं: फेफड़ों की क्षमता बढ़ाना, रक्त में ऑक्सीजन बढ़ाना, तनाव कम करना, मन को शांत करना, रक्तचाप को संतुलित करना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना।

कुछ आम प्राणायाम कौन से हैं?

सामान्य प्राणायाम हैं:

  • अनुलोम-विलोम (वैकल्पिक नासिका श्वास)
  • भ्रामरी (भौंरा गुंजन श्वास)
  • कपालभाति (उदर श्वास की सफाई)
  • भस्त्रिका (तेज़ श्वास)
  • उज्जायी (विजयी श्वास)
  • शीतली (ठंडी श्वास)
कपालभाति क्या है और किन्हें इससे बचना चाहिए?

कपालभाति एक शक्तिशाली प्राणायाम है जिसमें तेज़ी से उदर को बाहर-अंदर करके श्वास छोड़ा जाता है। यह पेट की चर्बी कम करने, पाचन सुधारने और फेफड़ों की सफाई में मदद करता है। हालाँकि, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया, ग्लूकोमा, या गर्भावस्था में कपालभाति से बचना चाहिए।

सूर्य नमस्कार क्या है और इसमें कितने आसन होते हैं?

सूर्य नमस्कार योग का एक प्रसिद्ध अनुक्रम है जो 12 मुद्राओं/आसनों की एक श्रृंखला है, जिसे सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। यह शरीर की सभी प्रमुख मांसपेशियों को सक्रिय करता है, रक्त संचार बढ़ाता है और दिन की शुरुआत में ऊर्जा देता है। नियमित रूप से करने से संपूर्ण शारीरिक और मानसिक लाभ होता है।

योग के 12 मुद्राएँ सूर्य नमस्कार में कौन-कौन सी हैं?

सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राएँ (क्रम से):

  1. प्रणामासन (प्रार्थना मुद्रा)
  2. हस्त उत्तानासन (हाथ ऊपर)
  3. पादहस्तासन (आगे झुकना)
  4. अश्व संचालनासन (घोड़ा मुद्रा)
  5. दंडासन (तख़्ता)
  6. अष्टांग नमस्कार (आठ अंग भूमि पर)
  7. भुजंगासन (सर्प मुद्रा)
  8. अश्व संचालनासन (फिर से)
  9. पादहस्तासन (फिर से)
  10. हस्त उत्तानासन (फिर से)
  11. प्रणामासन (अंत)
  12. (सूर्य नमस्कार में 12 चरण होते हैं, हालाँकि गिनती भिन्न-भिन्न हो सकती है — सामान्यतः 12 मानी जाती है।)
योग करते समय दर्द हो तो क्या करें?

हल्की सी खिंचाव-अनुभूति सामान्य है, लेकिन तीव्र या तेज़ दर्द कभी बर्दाश्त न करें। तुरंत मुद्रा छोड़ दें, आराम करें और श्वास को सामान्य करें। यदि दर्द बना रहे या गंभीर हो, तो चिकित्सक से परामर्श करें। सही तकनीक सीखना और शरीर की सीमा का सम्मान करना आवश्यक है।

क्या योग से चोट लग सकती है?

सही तरीके और सही मार्गदर्शन के बिना योग में चोट लग सकती है, विशेषकर यदि आसन गलत तरीके से या अति तीव्रता से किए जाएँ। इसलिए प्रमाणित प्रशिक्षक से सीखना, वार्म-अप करना, और अपनी सीमा से आगे जबरन न बढ़ना आवश्यक है।

क्या हर दिन एक ही तरह का योग करना चाहिए?

नहीं, विविधता लाभदायक है। अलग-अलग आसन शरीर के विभिन्न अंगों को लक्षित करते हैं। हालाँकि, एक स्थापित अनुक्रम (जैसे सूर्य नमस्कार) की नियमितता भी लाभकारी है। संतुलित रूप से ताकत, लचीलापन और संतुलन के आसन मिलाकर करें।

क्या योग नींद सुधारता है?

हाँ। योग मन को शांत करता है, तनाव घटाता है और शरीर को आराम देता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। सोने से पहले हल्के स्ट्रेच, भ्रामरी प्राणायाम और शवासन करना अनिद्रा में बहुत लाभदायक है।

शवासन क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

शवासन ("लाश की मुद्रा") एक विश्राम आसन है जिसमें पीठ के बल लेटकर शरीर को पूर्ण रूप से शिथिल किया जाता है। यह योग सत्र का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को आसनों से प्राप्त लाभ को आत्मसात करने और मन को गहन शांति देने में मदद करता है।

क्या योग रक्तचाप (बीपी) में मदद करता है?

हाँ, लेकिन सावधानी से। अनुलोम-विलोम, शवासन, और हल्के आसन रक्तचाप संतुलित करने में सहायक हैं। हालाँकि, उच्च रक्तचाप में उल्टे आसन, तीव्र गति वाले आसन और कपालभाति से बचना चाहिए। उच्च बीपी के मरीज़ डॉक्टर की सलाह से ही योग करें।

क्या डायबिटीज़ (मधुमेह) में योग फायदेमंद है?

हाँ। नियमित योग रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने, इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने और वज़न प्रबंधन में मदद करता है। ताड़ासन, मंडूकासन, वज्रासन, और पश्चिमोत्तानासन डायबिटीज़ के लिए लाभदायक माने जाते हैं, लेकिन दवाओं की जगह नहीं लेते।

क्या योग थायरॉइड में मदद करता है?

हाँ। सर्वांगासन, मत्स्यासन, हलासन और सेतुबंधासन (Bridge Pose) जैसे गले व छाती के क्षेत्र को सक्रिय करने वाले आसन थायरॉइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली में सहायक हो सकते हैं। हालाँकि, यह चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है; थायरॉइड के मरीज़ डॉक्टर की सलाह से योग करें।

क्या योग जोड़ों के दर्द और गठिया में मदद करता है?

हाँ। हल्के और नियमित योग जोड़ों को चिकना (लुब्रिकेट) रखता है, मांसपेशियों को मज़बूत करता है और कठोरता कम करता है। गठिया में ताड़ासन, वृक्षासन, और हल्के स्ट्रेच फायदेमंद हैं, लेकिन तीव्र सूजन या दर्द के समय आसन न करें और डॉक्टर से परामर्श करें।

योग करने के बाद कितना समय पानी पीना चाहिए?

योग सत्र के तुरंत बाद बहुत अधिक पानी पीने से बचें। 15–30 मिनट बाद हल्के घूँट में पानी पीना सर्वोत्तम है। योग सत्र के दौरान शरीर को ठंडा होने दें। सत्र से पहले पर्याप्त पानी अवश्य पिएँ।

क्या योग के बाद नहाना चाहिए?

योग के तुरंत बाद नहाना (विशेषकर ठंडे पानी से) उचित नहीं है, क्योंकि शरीर गर्म होता है और तापमान में अचानक बदलाव हानिकारक हो सकता है। योग के 30–60 मिनट बाद सामान्य तापमान के पानी से नहाना बेहतर है।

क्या योग के बाद खाना खाया जा सकता है?

योग के तुरंत बाद भारी भोजन न करें। सत्र के 30–60 मिनट बाद हल्का और संतुलित भोजन लेना सर्वोत्तम है। इससे शरीर को आसनों से प्राप्त लाभ को आत्मसात करने का समय मिलता है।

क्या ठंड या ज़ुकाम में योग करना चाहिए?

हल्के ज़ुकाम में हल्के योग और प्राणायाम किए जा सकते हैं, लेकिन बुखार, गंभीर ज़ुकाम या संक्रामक बीमारी में शरीर को पूर्ण विश्राम देना चाहिए और योग स्थगित करना चाहिए। बीमार होने पर शरीर की सुनें।

क्या सर्दियों या गर्मियों में योग अलग तरह से करना चाहिए?

सर्दियों में योग करने से शरीर गर्म रहता है और रक्त संचार बेहतर होता है — लेकिन ठंडे वातावरण में वार्म-अप पहले करें। गर्मियों में सुबह जल्दी या शाम को योग करें, हल्के आसन करें और अधिक पानी पिएँ। शीतली और शीतकारी प्राणायाम गर्मी में शरीर को ठंडा रखते हैं।

क्या मोबाइल देखते या टीवी चलाते हुए योग करना सही है?

नहीं। योग के लिए ध्यान और एकाग्रता आवश्यक है। योग के दौरान मोबाइल, टीवी या अन्य व्यवधान से ध्यान भटकता है और अभ्यास का लाभ कम हो जाता है। शांत और व्यवधान-रहित स्थान में योग करें।

क्या योग को करने में सबसे आम गलतियाँ क्या हैं?

सबसे आम गलतियाँ हैं:

  • गलत श्वास या श्वास को रोकना
  • जबरन अधिक खिंचाव करना (सीमा से बाहर)
  • वार्म-अप और कूल-डाउन की अनदेखी
  • भरे पेट योग करना
  • अनियमित अभ्यास
  • एक-तरफ़ा (गलत संरेखण) से आसन करना
  • शवासन छोड़कर अचानक उठना
योग करते समय शरीर में "कड़कड़" या आवाज़ आना सामान्य है?

हाँ। शुरुआत में जोड़ों में कड़कड़ की आवाज़ (क्रिकिंग) आना आम है, क्योंकि शरीर के जोड़ और स्नायु खुल रहे होते हैं। हालाँकि, यदि आवाज़ के साथ दर्द या सूजन हो, तो उस आसन को रोक दें और डॉक्टर से सलाह लें।

योग के लिए कौन-सा वातावरण सबसे अच्छा है?

योग के लिए शांत, स्वच्छ, हवादार और समतल स्थान सबसे अच्छा है। सुबह की ताज़ी हवा सर्वोत्तम मानी जाती है। फर्श पर सीधी और समतल सतह पर मैट बिछाकर योग करें। प्राकृतिक प्रकाश और शांति एकाग्रता में मदद करते हैं।

क्या योग में मंत्र या "ॐ" का जाप करना ज़रूरी है?

"ॐ" का जाप वैकल्पिक है, लेकिन कई योग परंपराओं में इसे किया जाता है। इससे ध्यान केंद्रित होता है, मन शांत होता है और श्वास की लय स्थापित होती है। यदि आपको असुविधा महसूस हो, तो बिना जाप के भी योग के पूर्ण लाभ मिल सकते हैं।

क्या योग से बाल, त्वचा और उम्र बढ़ने पर असर पड़ता है?

हाँ। योग से रक्त संचार और ऑक्सीजन बढ़ती है, जो त्वचा को चमकदार बनाती है और बालों की जड़ों को पोषण देती है। उल्टे आसन (जैसे सर्वांगासन) चेहरे पर रक्त प्रवाह बढ़ाकर उम्र बढ़ने के लक्षण कम करते हैं। योग तनाव घटाकर भी उम्र-रोधी लाभ देता है।

क्या योग सिर्फ़ "स्ट्रेचिंग" है?

नहीं। यद्यपि आसनों में स्ट्रेचिंग शामिल है, परंतु योग एक संपूर्ण प्रणाली है जिसमें श्वास नियंत्रण, ध्यान, संतुलन, शक्ति, सहनशक्ति और आत्म-जागरूकता शामिल है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन-शरीर-आत्मा का संतुलन है।

योग की शुरुआत कैसे करें — एक व्यावहारिक सलाह?
  1. प्रमाणित योग प्रशिक्षक से या विश्वसनीय पुस्तक/ऐप से शुरुआत करें।
  2. सरल आसनों (ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, मार्जरी) से शुरू करें।
  3. रोज़ाना कम से कम 15–30 मिनट दें।
  4. श्वास पर ध्यान दें और हर आसन में सावधान रहें।
  5. वार्म-अप और अंत में शवासन करें।
  6. शरीर की सीमा का सम्मान करें — जबरदस्ती न करें।
  7. नियमितता बनाए रखें; धैर्य रखें, लाभ धीरे-धीरे मिलेगा।
  8. किसी भी चिकित्सीय स्थिति में पहले डॉक्टर से परामर्श करें।
आवश्यक सावधानी: यह जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए है और किसी पेशेवर चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी बीमारी, चोट, गर्भावस्था या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर और प्रमाणित योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लें।
Dr. Ajay Shukla
Dr. Ajay Shukla
MBBS, MD (Medicine), DM Endocrinology (SGPGI), MRCP SCE (Diabetes & Endocrinology) • 17+ years • About the doctor

स्वास्थ्य संबंधी कोई चिंता है?

डॉ. अजय शुक्ला से एंडोक्राइन और डायबिटीज़ परामर्श बुक करें।

Book Appointment WhatsApp Us
💬